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राष्ट्र का स्वरूप | कक्षा-10 साहित्यिक गद्यांश (450 से 700 शब्द)

धरती माता की कोख में जो अमूल्य निधियाँ भरी हैं, जिनके कारण यह वसुन्धरा कहलाती है, उनसे कौन परिचित न होना चाहेगा? लाखों-करोड़ों वर्षों से अनेक प्रकार की धातुओं को पृथ्वी के गर्भ में पोषण मिला है। दिन-रात बहनेवाली नदियों ने पहाड़ों को पीस-पीसकर अगणित प्रकार की मिट्टियों से पृथ्वी की देह को सजाया है।

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