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प्लास्टिक (plastic) अपशिष्टों का निस्तारण क्यों कठिन है?

प्लास्टिक अपशिष्टों का निस्तारण-

पॉलीथीन व प्लास्टिक का उपयोग अब व्यापक रूप से बढ़ता जा रहा है। अस्सी के दशक तक हाट-बाजार से उपभोक्ता वस्तुएँ कागज के लिफाफों अथवा हल्के कपड़े के थैलों में उपलब्ध होती थीं, परन्तु बढ़ती भौतिकता एवं शोखपन के कारण इनका स्थान पॉलीथीन ने ले लिया है। संश्लेषित प्लास्टिक एवं पॉलीथीन जैव निम्नीकरण (Bio-degradation) योग्य न होने के कारण वर्षों तक पारिस्थितिक-तन्त्र के लिए खतरा बनी रहेंगी।

प्लास्टिक अपशिष्ट ओं का निस्तारण क्यों कठिन है
प्लास्टिक अपशिष्ट ओं का निस्तारण क्यों कठिन है

नगरीय पर्यावरण में पॉलीथीन का उपयोग एक बड़ी समस्या है। इनके उपयोग के बाद इन्हें नाले-नालियों, नदियों, तालाबों, खुले स्थानों एवं उपजाऊ मृदा पर स्वतन्त्र विचरण के लिए छोड़ दिया जाता है। फलस्वरूप नालियाँ अवरुद्ध हो जाती हैं जिससे अनेक प्रकार के जीवाणुओं की उत्पत्ति होती है।

वर्तमान समय में किए गए एक अध्ययन के अनुसार महानगरों में प्रतिदिन 250 टन भार की पॉलीथीन थैलियों का कचरा निकलता है जिससे गन्दे जल के निकास एवं सीवर व्यवस्था में बाधा पड़ती है। सड़कों, गलियों एवं खुले स्थानों में चारों ओर गन्दा जल-मल फैला रहता है जिससे आवागमन बाधित हो जाता है इससे नगरीय जीवन नारकीय हो गया है तथा जल-निकास को सुचारु करने के लिए लाखों-करोड़ों रुपये व्यय करने पड़ते हैं, जिसने नगर-प्रशासन के आर्थिक ढाँचे को जर्जर कर दिया है।

प्लास्टिक अपशिष्ट से पर्यावरण को हानि-

पॉलीथीन एवं रैपर भार में बड़े ही हल्के होते हैं तथा वायु द्वारा इन्हें दूरवर्ती भागों तक उड़ा दिया जाता है। इनका एकत्रीकरण ऐसे स्थानों पर हो जाता है, जहाँ या तो कीचड़ एवं गन्दा जल एकत्र हो अथवा वर्षा का जल एकत्र हो। पॉलीपैक ने न केवल भोज्य पदार्थों बल्कि मृदा की उर्वरा-शक्ति को भी क्षीण कर दिया है।‌‌‌‌

प्लास्टिक अपशिष्ट समस्या-

हमारे देश में प्लास्टिक का प्रवेश 50 वर्ष से अधिक पुराना नहीं है यहाँ 1990 से इसके प्रचलन में अधिक तेजी आई और इसने लोहा, लकड़ी और कपड़े का विकल्प बनकर जन-सामान्य को अपनी ओर पूरी तरह से आकर्षित किया है। सस्ती व टिकाऊ होने के कारण अब गरीब व अमीर सभी इसका पूरी तरह प्रयोग करते हैं किन्तु पर्यावरण पर इसके दुष्प्रभावों से वैज्ञानिक, सामाजिक कार्यकर्ता, स्वयंसेवी संस्थाएँ और देश व राज्य की सरकारें चिन्तित हैं।

प्लास्टिक अपशिष्ट पर्यावरण में नष्ट नहीं होते बल्कि प्रत्येक दशा में पर्यावरण को नष्ट करते रहते हैं। इनका निस्तारण गम्भीर समस्या है। पॉलीथीन के थैले जल-निकास व्यवस्था में भारी बाधा पहुँचाते है। मिट्टी में दबाने पर यह उसे बंजर बना देता है। जलाने पर इससे ऐसी विषैली गैस निकलती है जो वायु को प्रदूषित कर देती है। इन्हीं सब कारणों से इसका निस्तारण गम्भीर समस्या बन गया है। वैज्ञानिकों ने अब अन्त में इसके पुन: चक्रण प्रक्रिया द्वारा फिर से पॉलीथीन थैले और अन्य वस्तुओं का उपयुक्त बताया है।

प्रश्न ओर उत्तर (FAQ)

प्लास्टिक अपशिष्टों का निस्तारण क्या है?

पॉलीथीन व प्लास्टिक का उपयोग अब व्यापक रूप से बढ़ता जा रहा है। अस्सी के दशक तक हाट-बाजार से उपभोक्ता वस्तुएँ कागज के लिफाफों अथवा हल्के कपड़े के थैलों में उपलब्ध होती थीं, परन्तु बढ़ती भौतिकता एवं शोखपन के कारण इनका स्थान पॉलीथीन ने ले लिया है।

प्लास्टिक अपशिष्ट समस्या क्या है?

हमारे देश में प्लास्टिक का प्रवेश 50 वर्ष से अधिक पुराना नहीं है यहाँ 1990 से इसके प्रचलन में अधिक तेजी आई और इसने लोहा, लकड़ी और कपड़े का विकल्प बनकर जन-सामान्य को अपनी ओर पूरी तरह से आकर्षित किया है।

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