Hubstd.in

Big Study Platform

  • Home
  • /
  • Other
  • /
  • ग्रीनहाउस प्रभाव | ग्रीनहाउस गैसों के पर्यावरण पर प्रभाव।
No ratings yet.

ग्रीनहाउस प्रभाव | ग्रीनहाउस गैसों के पर्यावरण पर प्रभाव।

ग्रीनहाउस प्रभाव | Green haus prabhav

ग्रीनहाउस प्रभाव एक ऐसी प्रक्रिया है जो तब होती है जब पृथ्वी के वायुमंडल में गैसें सूर्य की गर्मी को फंसा ( Gases in the atmosphere trap the sun’s heat ) लेती हैं। यह प्रक्रिया पृथ्वी को बिना वायुमंडल की तुलना में अधिक गर्म बनाती है। ग्रीनहाउस प्रभाव उन चीजों में से एक है जो पृथ्वी को रहने के लिए एक आरामदायक जगह बनाती है।

औद्योगिकीकरण की बढ़ती प्रक्रिया के कारण वायुमण्डल कार्बन-डाईऑक्साइड की मात्रा (atmospheric carbon dioxide) बढ़ी है, जिसने ग्रीनहाउस प्रभाव (Greenhouse effect) को जन्म दिया है। पृथ्वी पर पाई जाने वाली कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा बढ़ने से धरती की सतह से परावर्तित किरणों द्वारा उत्सर्जित होने वाली तापीय ऊर्जा (thermal energy) को वायुमण्डल से बाहर जाने से रोकती है। इस प्रकार तापीय ऊर्जा के वायुमण्डल सान्द्रण से धरती (Earth from Atmosphere Concentration) के औसत तापमान में वृद्धि होती है, जिसे विश्व व्यापी तापन (Global Warming) कहते हैं।

इन्हें भी पढ़ें: कैनाल किरणें क्या हैं? | कैथोड और एनोड किरणों के बीच अंतर

ग्रीनहाउस प्रभाव | ग्रीनहाउस गैसों के पर्यावरण पर प्रभाव।
ग्रीनहाउस प्रभाव | ग्रीनहाउस गैसों के पर्यावरण पर प्रभाव।

इन्हें भी पढ़ें: प्राकृतिक संसाधन की परिभाषा | महत्व | आवश्यकता?

ग्रीनहाउस गैसों के पर्यावरण पर प्रभाव | Green house geso ka paryavaran par prabhav

  • ऊष्मा संतुलन में परिवर्तन होने से जलवायु परिवर्तन होने की संभावना रहती है। मानसून में देरी, अकाल, बाढ़, चक्रवात में वृद्धि, बरसात में पांच से पच्चीस प्रतिशत (25%) कमी तथा लू की संभावनाएं बढ़ रही हैं।
  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से गंगोत्री और पिण्डारी ग्लेशियर निरंतर सिकुड़ रहे हैं। आर्कटिक और अंटार्कटिका के विशाल हिमखण्ड धीरे-धीरे पिघल रहे हैं जिससे जल स्तर में लगातार वृद्धि हो रही है। इसके कारण आने वाले समय में सागरीय तट जलमग्न हो जाएगें। नेचर जियोसाइंस पत्रिका में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार अंटार्कटिक में गर्मियों में बर्फ 10 गुना ज्यादा तेजी से पिघलने लगी है् समुद्र तल में 10 से 20cm की बढ़ोत्तरी हो चुकी है।
  • पृथ्वी का तापमान बढ़ने से सूखे का भयानक रूप सामने दिखाई देने लगा है। पिछले दशक में दुनिया के अनेक देश सूखे की चपेट में आते जा रहे हैं। राजस्थान में तो लगातार सूखा पड़ रहा है। इसी तरह 2001 में अमेरिका का पूर्वी भाग भी भयंकर सूखे की चपेट में रहा जो वर्ष 1985 के बाद अब तक का सबसे सूखा वर्ष था।
  • तापमान (Temperature) में वृद्धि होने पर वर्षा तथा मृदा में नमी की मात्रा में कमी होगी, जिससे अधिक जल की आवश्यकता वाली फसले जैसे-गेहूं व चावल की खेती में कमी आ जाएगी जिससे कृषि प्रभावित होगी।
  • जलवायु परिवर्तन के दौरान तापमान में विश्वव्यापी परिवर्तन से जीव-जन्तुओं पर प्रतिकूल प्रभाव होगा। वर्षा में कमी एवं तापमान में वृद्धि से वन क्षेत्र भी घटेगा। वनावरण में हास के परिणामस्वरूप जैव विविधता का भी हास होगा। विगत 100 वर्षों में यह वृद्धि मात्र 0.740°C रही है।
  • जलवायु परिवर्तन के कारण श्वसन संबंधी बीमारियों के कारक बढ़ जाएंगे जिससे मानव की मृत्यु दर बढ़ेगी। मच्छरों से फैलने वाले रोग जैसे-मलेरिया, डेंगू, पीला बुखार, जैसी महामारियां बढ़ जाएंगी।
  • यदि मानव जनित Co, का वातावरण में निरंतर सान्द्रण होगा तो महासागरीय भागों को Co, का अधिकाधिक अवशोषण करना पड़ेगा। यदि महासागरीय जल में co, का अवशोषण तथा विघटन सामान्य स्तर से अधिक होगा तो अम्लता बढ़ जाएगी, जिससे सागरीय पारिस्थितिकी तन्त्र की उत्पादकता घटेगी और जलीय जीवों के जीवन पर संकट आ जाएगा।

इन्हें भी पढ़ें: पादप प्रजनन किसे कहते है इसकी परिभाषा?

ध्यान देने योग्य कई बातें?

हम वास्तव में पृथ्वी को जीवन का समर्थन करने के लिए पर्याप्त गर्म रखने के लिए ग्रीनहाउस प्रभाव पर निर्भर हैं। यदि यह ग्रीनहाउस प्रभाव के लिए नहीं होता, तो पृथ्वी का औसत तापमान चंद्रमा की तरह अधिक होता, लगभग -20C।

CO2 केवल ग्रीनहाउस गैस नहीं है, या यहां तक ​​कि प्रमुख भी नहीं है। ग्रीनहाउस प्रभाव में जल वाष्प का योगदान लगभग 50-75% होता है। लेकिन ग्रह की जल वाष्प सामग्री लगभग स्थिर है, जबकि CO2 बढ़ रही है, जो लगभग 20-25% वार्मिंग प्रदान करती है। ग्रीनहाउस गैस के रूप में मीथेन CO2 की तुलना में काफी अधिक शक्तिशाली है, लेकिन वातावरण में इसकी मात्रा बहुत कम है (हालाँकि यह बढ़ भी रही है)।

इसलिए CO2 के दोगुने होने से तापमान में अंततः 2-4C की वृद्धि होने की उम्मीद है।

वास्तविक वायुमंडलीय मॉडल उससे कहीं अधिक जटिल हैं, क्योंकि उन्हें वायुमंडल और महासागरों के साथ-साथ जीवमंडल दोनों में द्रव गति का हिसाब देना होता है। लेकिन सरल मॉडल भविष्यवाणियों के साथ उल्लेखनीय रूप से अच्छी तरह से ट्रैक करता है।

इन्हें भी पढ़ें: संसाधन किसे कहते है? प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है?

प्रश्न ओर अत्तर (FAQ)

ग्रीनहाउस गैसें क्या हैं और इसके प्रभाव क्या हैं?

ग्रीनहाउस गैसें, जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन, नाइट्रस ऑक्साइड, और कुछ सिंथेटिक रसायन, पृथ्वी की कुछ बाहर जाने वाली ऊर्जा को फँसाते हैं, इस प्रकार वातावरण में गर्मी बनाए रखते हैं।

ग्रीनहाउस गैसों (Greenhouse gases) के पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है एक कारण बताइए।

राजस्थान में तो लगातार सूखा पड़ रहा है। इसी तरह 2001 में अमेरिका का पूर्वी भाग भी भयंकर सूखे की चपेट में रहा जो वर्ष 1985 के बाद अब तक का सबसे सूखा वर्ष था।

4 मुख्य ग्रीनहाउस गैसें कौन सी हैं?

ग्रीनहाउस गैसों का अवलोकन
1) कार्बन डाइऑक्साइड।
2) मीथेन।
3) नाइट्रस ऑक्साइड।
4) फ्लोरिनेटेड गैसें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

downlaod app