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हरित गृह प्रभाव (green house effect) क्या है?

ग्रीनहाउस प्रभाव एक बुरा रूपक है जो पृथ्वी के गर्म होने और ठंडा होने की व्याख्या नहीं करता है। पृथ्वी एक खुला वातावरण है जिसमें वास्तविक ग्रीनहाउस की तरह कोई कंबल या आवरण नहीं है। तथाकथित ग्रीनहाउस गैसें मिनट हैं और संवहन या बैक रेडिएशन के भौतिकी को रोकने के लिए बड़े अंतराल छोड़ती हैं।

हरित गृह प्रभाव (green house effect) –

मानव की प्रकृति विरोधी नीतियों एवं कार्यों के कारण संतुलित जलवायु चक्र असंतुलित हो गया है। इसी संदर्भ में पृथ्वी के वायुमण्डल में कुछ विशेष गैसों की मात्रा इस सीमा तक बढ़ गई है कि धरती की ऊष्मा या गर्मी बाहर नहीं निकल पा रही है, इससे उत्पन्न प्रभाव को हरित गृह प्रभाव (green house effect) कहते हैं।

हरित गृह प्रभाव क्या है?
हरित गृह प्रभाव क्या है?

ऑक्सफोर्ड शब्दकोश के अनुसार-” वायुमण्डल में मानव जनित कार्बन-डाईऑक्साइड के आवरण प्रभाव के कारण पृथ्वी की सतह के प्रगामी तापन (Progressive Warming) को हरित गृह प्रभाव कहते हैं।

हरित गृह प्रभाव (green house effect) उत्पन्न होने के कारण-

वनों का दोहन –

पृथ्वी के तापमान बढ़ने का सबसे महत्त्वपूर्ण कारण वनों की अंधाधुंध कटाई और बढ़ता हुआ औद्योगिकीकरण है। वनों की कटाई इसी गति से चलती रही, तो ग्लोबल वार्मिंग को रोकना सम्भव नहीं होगा। 1980-90 का दशक पृथ्वी के इतिहास का सबसे गर्म दशक माना गया, तब ज्ञात हुआ कि पृथ्वी का तापमान बढ़ने से रोकना है, तो वातावरण से ग्रीन हाउस गैसों का स्तर कम करना होगा।

हवाई यातायात –

बढ़ते हवाई यातायात के कारण भी वायुमण्डल का तापमान तीव्र गति से बढ़ रहा है जिससे’ ग्लोबल वार्मिंग का खतरा गम्भीर रूप ले रहा है। एक अनुमान के अनुसार प्रत्येक चार हजार मील की हवाई यात्रा से लगभग एक टन कार्बन डाईऑक्साइड का वायुमण्डल में उत्सर्जन होता है।

ग्लोबल वार्मिंग के लिए जिम्मेदार ग्रीन हाउस गैसों में से यह प्रमुख गैस है। पर्यावरण के क्षेत्र में काम कर रहे गैर सरकारी संगठन एनवायर्न के अनुसार विमान वायुमण्डल में कार्बन-डाईऑक्साइड के अलावा नाइट्रस ऑक्साइड जैसी खतरनाक और जहरीली गैस और जल वाष्प भी छोड़ते हैं। इससे अत्यधिक ऊंचाई पर कार्बन- डाईऑक्साइड से दो गुना से ज्यादा’ ग्लोबल वार्मिंग’ होती है।

हवाई यातायात से होने वाले प्रदूषण का एक और खतरनाक पहलू यह है कि कम ऊंचाई के मुकाबले 28 से 40,000 फीट की ‘ऊंचाई पर’ ग्रीन हाउस गैसों का सबसे अधिक प्रभाव होता है। इतनी ऊंचाई पर प्रदूषणकारी तत्व कम ऊंचाई की तुलना में 500 गुना ज्यादा समय तक यानी 6 महीनों तक वायुमण्डल में रहते हैं। अत्याधिक ऊंचाई पर कम तापमान के कारण जलवायु पर इनका प्रभाव भी बढ़ जाता है। इतनी ऊंचाई पर एक लीटर ईंधन जलाने से, धरती के निकट एक लीटर ईंधन जलाने की तुलना में दो गुना ज्यादा प्रदूषण फैलता है।

धुआं –

विद्युत उत्पादन केन्द्रों, उद्योगों में कोयला एवं खनिज तेल के दहन से चिमनियों से, यातायात के साधनों में दहन होने वाले ईंधन से तथा घरेलू उपयोग के दौरान लकड़ियों के दहन से CO, गैस का भारी मात्रा में विमोचन होता है।

प्रश्न ओर अत्तर (FAQ)

हरित ग्रह प्रभाव (green house effect) किसे कहते हैं?

मानव की प्रकृति विरोधी नीतियों एवं कार्यों के कारण संतुलित जलवायु चक्र असंतुलित हो गया है। इसी संदर्भ में पृथ्वी के वायुमण्डल में कुछ विशेष गैसों की मात्रा इस सीमा तक बढ़ गई है कि धरती की ऊष्मा या गर्मी बाहर नहीं निकल पा रही है, इससे उत्पन्न प्रभाव को हरित गृह प्रभाव कहते हैं।

ग्रीन हाउस (green house effect) कितने प्रकार के होते हैं?

शास्त्रीय ग्रीनहाउस,
बहुभुज ग्रीनहाउस,
कमाना ग्रीनहाउस,
पिरामिड ग्रीनहाउस,
मिनी ग्रीन हाउस,
डच ग्रीनहाउस

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