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जर्मनी का एकीकरण कब और कैसे हुआ?

एकीकरण से आप क्या समझते हैं? | ekikaran kise kahate hain

एकीकरण, सबसे सामान्य अर्थों में, चीजों को एक साथ लाने और एकजुट करने वाला कोई भी हो सकता है: दो या दो से अधिक अर्थव्यवस्थाओं, संस्कृतियों, धर्मों (आमतौर पर समकालिकता कहा जाता है) आदि का एकीकरण।

फ्रैंकफर्ट की संधि के द्वारा जर्मनी का एकीकरण पूरा हुआ। यह संधि 10 मई 1871 ई० को फ्रांस और जर्मनी के बीच हुई थी। और 3 अक्टूबर 1990 को पूर्वी जर्मनी का पश्चिमी जर्मनी में एकीकरण हो गया था, और जर्मनी का एकीकरण बिस्‍मार्क ने किया. था और बिस्‍मार्क प्रशा के शासक विलियम प्रथम का प्रधानमंत्री थे।

जर्मनी को पहले पवित्र रोमन साम्राज्य के तहत कई अलग-अलग जर्मन शहरों और राज्यों में विभाजित किया गया था, जिसमें साम्राज्य एक सरकार के तहत केंद्रीकृत नहीं था और सम्राट और ड्यूक के बीच गृह युद्धों ने इसे एक राष्ट्र में एकजुट करने की किसी भी आशा को नष्ट कर दिया था। जब नेपोलियन ने साम्राज्य पर विजय प्राप्त की, तो हैब्सबर्ग के फ्रांज द्वितीय, जो उस समय के सम्राट थे, को नेपोलियन को अपने विरासत में मिले मुकुट पर दावा करने से रोकने के लिए इसे समाप्त करना पड़ा और उसने इसके बजाय अपना नया ऑस्ट्रियाई साम्राज्य बनाया। जर्मन राष्ट्रवाद ने आकार लेना शुरू कर दिया क्योंकि वे फ्रांसीसी क्रांति से प्रभावित थे और अपनी भूमि में फ्रांसीसी आक्रमण से बचाव के लिए।

जर्मनी का एकीकरण कब और कैसे हुआ
जर्मनी का एकीकरण कब और कैसे हुआ

नेपोलियन के अंत के बाद, वियना के कांग्रेस के दौरान एक नए जर्मन संघ का गठन किया गया था जिसमें पूर्व मतदाता राज्य बन गए थे और कई मुक्त शहरों को जोड़ा गया था। प्रशिया और ऑस्ट्रिया दोनों के पास जर्मन संघ के अंदर और बाहर की भूमि थी और इसने उनके बीच संघर्ष पैदा कर दिया क्योंकि ऑस्ट्रियाई सम्राट राष्ट्रपति थे लेकिन उनकी भूमिका को प्रशिया के राजा द्वारा चुनौती दी जा रही थी। 1848 की मार्च क्रांति के दौरान जर्मनों ने फ्रैंकफर्ट में एक संसद का निर्माण किया, लेकिन यह अल्पकालिक था क्योंकि कोई अन्य जर्मन राज्य उनका समर्थन नहीं करना चाहता था। प्रशिया ने वेस्टफेलिया के आसपास अपनी नई संलग्न भूमि के साथ औद्योगीकरण शुरू कर दिया क्योंकि यह संसाधनों में समृद्ध था। चांसलर ओटो वॉन बिस्मार्क ने टैरिफ को कम करने और संघ में मुक्त व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक टोल-फ्री नीति शुरू की और प्रशिया की आबादी में काफी विस्तार हुआ जिसमें उनकी सेना शामिल थी। चूंकि ऑस्ट्रिया में कई गैर-जर्मन हंगरी, क्रोएशिया, गैलिसिया आदि की भूमि में बस गए थे, प्रशिया ने इस अवसर का उपयोग ऑस्ट्रिया के खिलाफ लड़ने के लिए किया और वे ऑस्ट्रिया को अलग-थलग छोड़कर जीत गए।

नेपोलियन III के तहत फ्रांस अपनी तटस्थता के लिए एक समझौता चाहता था और बिस्मार्क ने जानबूझकर ईएमएस डिस्पैच नामक टेलीग्राम की सामग्री को संपादित किया जिसने फ्रांस को नाराज कर दिया। फ्रांस ने प्रशिया पर युद्ध की घोषणा की और बावेरिया जैसे दक्षिणी जर्मन राज्य राइन से परे फ्रेंच विस्तार को रोकने के लिए युद्ध में शामिल हो गए। फ्रांस हार गया और एक नया जर्मन साम्राज्य घोषित किया गया जिसमें बर्लिन के प्रशिया राजा जर्मन सम्राट बने।

जर्मनी का एकीकरण | jarmani ka ekikaran

1848 ईस्वी के बाद जर्मनी की दशा

फ्रैंकफर्ट की संधि की असफलता ने जर्मनी के उदार वादियों की आशाओं पर पानी फेर दिया और वे बहुत निराश हो गए।एकीकरण के सभी प्रयत्नों की असफलता ने जर्मनी की राष्ट्रीय भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाई। 1849 ईस्वी में जर्मन देश भक्तों ने प्रसा के नेतृत्व में जर्मनी का एकीकरण करने का प्रयास किया, परंतु प्रसा के राजा ने जर्मनी का ताज ग्रहण करने से इंकार कर दिया क्योंकि उसका विचार था कि ऐसा करने से उसे ऑस्ट्रेलिया से युद्ध अवश्य करना पड़ेगा।

प्रसा के राजा के प्रयास

इस समय प्रशा का राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ था। फ्रैंकफर्ट की राष्ट्रीय सभा भंग होने के बाद उसने जर्मनी के एकीकरण का प्रयास किया। उसने बवेरिया, हैनोवर, तथा आदि जर्मन राज्यों से संधि करके अरफर्ट मैं एक जर्मन संघ का निर्माण किया। ऑस्ट्रेलिया ने प्रसा के इस कार्य का विरोध किया और स्थिति यह हो गई कि ऑस्ट्रेलिया और प्रशा में युद्ध छूट जाने की संभावना दिखाई पड़ने लगी।

प्रशा की शक्ति का उत्थान

प्रशा के राजा फ्रेडरिक विलियम चतुर्थ मस्तिष्क की बीमारी के कारण 2 जनवरी, 1861 ईस्वी को परलोक सुधार गया और उसका भाई विलियम प्रथम, जो 1858 ईस्वी से रिजेण्ट का कार्य कर रहा था, प्रशा का सम्राट बना। विलियम प्रथम के राज्यारोहण से प्रशा में एक नया युग का प्रादुर्भाव हुआ। वह बड़ा साहसी अनुभवी और योग्य सैनिक था। गद्दी पर आसीन होने के समय उसकी आयु 63 वर्ष थी। उसका अधिकांश जीवन युद्ध में ही व्यतीत हुआ था। वह एक बुद्धिमान एवं दूरदर्शी व्यक्ति था।

बिस्मार्क की नीति

बिस्मार्क रक्त और लोह की नीति का अनुगामी था। वह बड़ा साहसी और निर्भीक व्यक्ति था। उसने प्रधानमंत्री बनते समय किसी के समक्ष नकारात्मक ना होने की प्रतिज्ञा की थी। उसने अपनी योग्यता से विलियम प्रथम और संसद के उच्च सदन का समर्थन प्राप्त कर लिया था। राज्य की कार्यपालिका और सेना पर उनका पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका था।

बिस्मार्क द्वारा जर्मनी का एकीकरण

बिस्मार्क महान कूटनीतिज्ञ था। उसने प्रशा सैन्य संगठन करके जर्मनी का एकीकरण करनेश्रका निश्चय किया। फ्रांस को पराजित करके बिस्मार्क ने जर्मनी का एकीकरण पूर्ण कर दिया।

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